Posts tagged with the keyword: ‘poem’
Written by Sumit Gupta
Hindi Poetry
May 10, 2013
तुझे देखा तो यह माना
की तू सोने की मूरत है
तुझे जाना तो यह पहचाना
कि तू कितनी खूबसूरत है
मैं तो हो गया हूँ घायल
जबसे देखी तेरी नजाकत है
तेरी निगाहों ने कर दिया है कायल
बस एक ये ही शिकायत है
देख के तेरा चेहरा इतना भोला
सूझे मुझे भी पल पल शरारत है
जिस रोग ने बना दिया मुझे दीवाना
वोह तेरी याद ए मोहब्बत है
इतना इंतज़ार न करवाओ
कि अभी दूर वो शुभ मुहूरत है
बस जल्दी से तुम आ जाओ
कि अब मुझे तेरी जरुरत है
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Written by Sumit Gupta
Hindi Poetry
Apr 19, 2013
सुबह सुबह जब आँख खुले
पल पल जब तक रात ढले
यह दिल तुझे ही महसूस करे माँ
और यह आँखें तुझे ही ढूंढें माँ
तेरी दांट मुझे अक्सर याद आये
प्रेम से पड़ी मार आज मुझे रुलाए
यह कान तेरी ही वाणी ढूंढे माँ
और यह आँखें तुझे ही ढूंढे माँ
तेरे हाथो का स्पर्श नहीं भूला मै
तेरी गोद की नींद नहीं भूला मै
यह मस्तक तेरा ही आँचल ढूंढे माँ
और यह आँखें तुझे ही ढूंढे माँ
तेरी ममता की चादर बहुत बड़ी है
तेरे प्यार की बोछार एक निरंतर झड़ी है
मेरा हर शब्द तुझे ही हर पल पुकारे माँ
और यह आँखें तुझे ही ढूंढे माँ
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Written by Sumit Gupta
Hindi Poetry
Apr 6, 2013
थोडा थोडा करके तुम्हे सताने में
बातों बातों में तुम्हे हँसाने में
आँखें झुकाके तुम्हारे शर्माने में
सामने हो तो घूर घूर के देखने में
और कभी कभी तुम्हारी डांट खाने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में ।।
सुबह सुबह तुम्हारी आँवाज़ सुनने में
रात भर बात करके तुम्हे जगाने में
खो जाना तेरे धीरे धीरे मुस्काने में
पंगे लेके तुझे जान बूझकर रुठाने में
और फिर प्यार से तुझे मानाने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में ।।
तुम्हारे हाथो से पचरंगा आचार चखने में
बहुत इंतज़ार के बाद तुमसे मिलने में
बहाने बना कर तुम्हे अपने पास रखने में
मिलने के बाद तुम्हे जाने ना देने में
और छोटी छोटी बातो पे तुमसे लड़ने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में ।।
साथ मिलकर अपने भाई बहनों को छेड़ने में
तुम्हारे लिए शरारत भरी शायरी लिखने में
अपनी पुरानी बीती यादें तुमसे बाटने में
तुम्हारी बातें सुनके तुम्हे समझने में
और पल पल तुम्हे अपने करीब लाने में
बड़ा मज़ा आये मुझे यह सब करने में… Read the rest
Written by Sumit Gupta
Life
Mar 26, 2013
I have tried to scream, and to yell
Tried every way I could react,
But can you hear me? No one can tell..
How could this be the final act?
Sometimes I feel mad
So hard was the impact,
I sometimes wonder and feel sad
Is this curtains on the final act?
Suddenly I had to say Goodbye
It all seems so abstract
The only question I ask is – WHY
But no answers after the final act..
I think I lost a part of me,
As I no longer feel intact !
She must have completed her duty,
Without notice she scripted her final act !
Life only moves in one direction,
That is the only true fact !
I guess I have only one option,
To start afresh after her final act!!
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Written by Sumit Gupta
Hindi Poetry
Mar 19, 2013
जो दिल की धड़कन पहचान ले
वोह गालो में लाली नहीं ढूँढता
जो ज़िन्दगी को जीना सीख ले
वोह उसमे अपने पसंदीदा रंग नहीं ढूँढता
जो खुदा की दिखाई राह पे चल पड़े
वोह मस्जिद और मंदिर नहीं ढूँढता
जो ज़िन्दगी को जीना सीख ले
वोह हर गली अल्लाह राम नहीं ढूँढता
जो अपने काम में दिल लगाने सीख ले
वोह दिन के बाद शाम नहीं ढूँढता
जो जिंदगी को जीना सीख ले
वोह शराब में अपना जाम नहीं ढूँढ़ता
जो मुश्किलों में खड़ा रहना सीख ले
वोह दूसरो में अपना सहारा नहीं ढूँढता
जो ज़िन्दगी को जीना सीख ले
वोह हर समुन्दर का किनारा नहीं ढूँढता
जो मंजिल मंजिल मुसकाना सीख ले
वोह हँसने के लिए चुटकुले नहीं ढूँढता
जो ज़िन्दगी को जीना सीख ले
वोह दूसरो में अपनी पहचान नहीं ढूँढता
जो मौसम का आनंद लेना सीख ले
वोह बारिश में छाता नहीं ढूँढता
जो ज़िन्दगी को जीना सीख ले
वोह रात में सूरज दिन में चाँद नहीं ढूँढता
जो जीवन की शायरी पहचान ले
वोह… Read the rest
Written by Sumit Gupta
Hindi Poetry
Mar 12, 2013
तुम्हे देखा तो तुम्हारी आँखों से
तुम्हे सुना तो तुम्हारी आवाज़ से
जाने क्यों मुझे प्यार हो गया !!
तुमने पुकारा तो तुम्हारे होठो से
तुम पास आई तो तुम्हारी सासों से
जाने क्यों मुझे प्यार हो गया !!
तुम्हारे बाल लहराए तो उनकी लटो से
तुमने कदम बढ़ाये तो तुम्हारी पायल से
जाने क्यों मुझे प्यार हो गया !!
तुम शरमाई तो तुम्हारी अदा से
तुम मुस्काई तो तुम्हारी हसी से
जाने क्यों मुझे प्यार हो गया !!
तुम्हे पहचाना तो तुम्हारी हस्ती से
और तुमने धमकाया तो तुम्हारी धमकी से
जाने क्यों मुझे प्यार हो गया !!
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Written by Sumit Gupta
Hindi Poetry
Mar 5, 2013
सपने ऐसे देखो जो अम्बर से करे बात
लेकिन कभी धरती की पकड़ ना छोड़ना !
चाहे जितनी बार खानी पड़े मात
लेकिन सपने देखना नहीं छोड़ना !!
अपनी तरफ आती हर मुसीबत
को हिम्मत से सीखो लड़ना !
जब उम्मीदों की हर दीवार दह जाए
तो भी सपने देखना मत छोड़ना !!
शरीर या बदन के थकने पर नहीं
काम पूरा होने पर ही दोस्तों बैठना !
अगर रात भी काम करने में गुजर जाए
तो भी सपने देखना नहीं छोड़ना !!
चाहे दिन, माह और साल निकल जाए
बेशक निकल जाये खून, या बह जाए पसीना !
मंजिल की तलाश में अगर कुम्भ भी निकल जाए
तो भी तुम सपने देखना मत छोड़ना !!
इस रस्ते निकल पड़े तो वापस नहीं मुड़ना है
क्या कर सकते है हम इस दुनिया को दिखाना है !
पर्वत चट्टानों से भी आगे हमें जाना है
हर कदम पे नए सपने देखना नहीं छोड़ना है !!
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Written by Sumit Gupta
Hindi Poetry
Jan 29, 2013
सागर से भी विशाल हो प्यार जिसका
जो हर ठोकर के बाद दिखाए सही रास्ता
जो इन्सान होकर भी हो एक फ़रिश्ता
उस हस्ती को कहते है माँ !!
जो तुम्हारी फ़िक्र को तुमसे पहले जाने
जो तुम्हे तुम्से भी बहतर पहचाने
तुम्हारी हर इच्छा पे जो कह दे हा
उस हस्ती को कहते है माँ !!
जिसकी गोद हो तुम्हारा तकिया
जो तुम्हे सुलाए गाते हुए लोरिया
हमेशा रहेगी साथ जिसकी दुआ
उस हस्ती को कहते है माँ !!
जो ऊँगली पकड़ चलना सिखाए
हर मुस्किल में होसला बढ़ाये
अपने खून से जो लिखे हमारा भविश्य
उस हस्ती को कहते है माँ !!
जो तुम्हे मारे भी प्यार से
तुमसे रूठे तो भी प्यार से
तुम्हारे आँसू देख जो रो पड़े
उस हस्ती को कहते है माँ !!
जो आँख खोले तो तुम्हे ही ढूंढे ,
आँख बंद हो तो तुम्हारे ही सपने देखे
जो खुदा से भी मांगे तुम्हारी ही खुशिया
उस हस्ती को कहते है माँ !!
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